चंदखुरी के बाद शिवरीनारायण में काम पूरा

छत्तीसगढ़ भगवान श्री राम के ननिहाल के रूप में संपूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। वनवास काल में श्रीराम ने यहां महत्वपूर्ण समय व्यतीत किया। यहॉं के ऋषि आश्रम, प्रकृति के मध्य वनवास काटा, इसलिए यहॉं के जन सूचियों, लोक कथाओं, आम जनजीवन में राम रचे बसे हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा रायपुर छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के रूप में प्राचीनतम महत्व के वैश्विक पर्यटन क्षेत्रों का विस्तार किया जा रहा है। रायपुर जिले में माता कौशल्या की जन्म स्थली चंदखुरी के बाद जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में भी विकास कार्य पूरा हो चुका है जिसका लोकार्पण 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। इसके लिए तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत शुक्रवार से हो गई है। छत्तीसगढ़ से जुड़ी भगवान श्रीराम के वनवास काल की स्मृतियों को सहेजने तथा संस्कृति में वह पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना शुरू हो गई है, इसके पहले चरण में चयनित ९ हो पर्यटन तीर्थों का तेजी से कायाकल्प कराया जा रहा है। पर्यटन तीर्थों की आकर्षक लैंडस्कैपिंग के साथ-साथ पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। १३९ करोड़ कि इस परियोजना में कोरिया से लेकर सुकमा जिले तक भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े स्थलों का संरक्षण व विकास किया जा रहा है।

चंदखुरी से हुई है शुरुआत

मुख्यमंत्री ने चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में वर्ष २०१९ में भूमि पूजन कर राम वन गमन पर्यटन परिपथ के निर्माण की शुरुआत की थी। इस परिपथ में आने वाले स्थानों को रामायण कालीन थीम के अनुरूप सजाया और संवारा जा रहा है। इस परियोजना से भावी पीढ़ी को अपनी सनातन संस्कृति से परिचित होने के अवसर के साथ-साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को उच्च स्तर की सुविधाएं प्राप्त होंगी। माता कौशल्या मंदिर चंदखुरी के सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार के कार्यों का लोकार्पण के बाद पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है।

त्रिवेणी संगम पर स्थित है शिवरीनारायण

जांजगीर-चांपा जिले में प्राकृतिक सुंदर से परिपूर्ण शिवनाथ, जोंक और महानदी का त्रिवेणी संगम स्थल शिवरीनारायण है। विष्णुकांक्षी तीर्थ का संबंध शबरी और नारायण के होने के कारण इसे शबरी नारायण या शिवरीनारायण कहा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता शबरी ने वात्सल्य वश बेर चकखकर मीठे बेर श्री रामचंद्र जी को खिलाए थे। यहां नर‌‌-नारायण और माता शबरी का मंदिर है जिसके पास ऐसा वट वृक्ष है इसके पत्ते दोने के आकार के हैं।

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